| एस सी ए एवं राट्रीयकृत बैंक के माध्यम से कियान्वित किया जाना - |
| 1. निगम विकलांग व्यक्तियों को ऐसे कई क्रियाकलापों के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराता है जिससे कि उनकी आय में वृद्धि हो सके।. |
| ये क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं - |
| सेवा/ट्रेडिंग क्षेत्र में छोटा व्यवसाय स्थापित करने के लिए : |
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| बिक्री/ट्रेडिंग क्रियाकलाप के लिए 1-00 लाख रुपये तक का ऋण और सेवा क्षेत्र क्रियाकलाप के लिए 3-00 लाख रुपये। |
| जिस छोटे व्यवसाय, परियोजना अथवा क्रियाकलाप के लिए वित्तीय सहायता मांगी गई है उसे विकलांग व्यक्ति को स्वयं चलाना होगा और इस उपक्रम में कम से कम 15 प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों को रोजगार देना होगा। |
| वाणिज्यिक क्रियाकलाप के लिए वाहन की खरीद हेतु : |
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| 5-00 लाख रुपये तक ऋण |
| वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए ऑटोरिक्शा सहित वाहन की खरीद |
| छोटी औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए : |
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| 5-00 लाख रुपये तक का ऋण |
| यह ऋण विकलांग व्यक्तियों को निर्माण, गढ़ाई एवं उत्पादन के लिए मुहैया कराया जाता है। विकलांग व्यक्ति ही इस कम्पनी का मालिक/मुख्य कार्यकारी होगा और अपनी कम्पनी में कम से कम 15 प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करेगा। |
| कृषि क्रियाकलाप के लिए: |
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| 5-00 लाख रुपये तक का ऋण |
| यह ऋण सहायता विकलांग व्यक्तियों को कृषि उत्पादन, सिंचाई, बागवानी, रेशमपालन, कृषि सेवा के लिए कृषि संबधी मशीनरी/उपकरण की खरीद, कृषि उत्पादकों के विपणन आदि के लिए मुहैया कराया जाता है। |
| मानसिक रुप से अविकसित व्यक्तियों, सेरेबरल पालसी और ऑटिज्म से पीड़ित के बीच स्व:रोजगार |
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| 3-00 लाख रुपये तक का ऋण |
| ऐसे मामलों में, वित्तीय सहायता आश्रित मानसिक रुप से अविकसित अथवा कानूनी अभिभावक अथवा पत्नी के माध्यम से प्रदान की जाती है। |
| 2. विकलांग व्यक्तियों की शिक्षा/प्रशिक्षण हेतु ऋण : |
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| उद्देश्य - |
| भारत एवं विदेशों में शिक्षा मान्यताप्राप्त शैक्षिक संस्थान से व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को करने के लिए ट्यूशन एवं अन्य फीस/मैनटेनन्स कॉस्ट/बुक्स एवं उपकरण आदि पर होने वाले खर्च को पूरा करने हेतु। |
| पात्रता -
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क) कोई भी भारतीय नागरिक जिसे 40 प्रतिशत अथवा उससे अधिक विकलांगता हो। |
| ख) माता-पिता/अभिभावकों की नियमित आय का साधन होना चाहिए। |
| ग) माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय 5,00,000/- रुपये (पांच लाख रुपये केवल) से कम होनी चाहिए। |
| घ) अपना पिछली परीक्षा कम से कम दूसरी श्रेणी (पूर्ण योग 50 प्रतिशत ) अथवा समकक्ष ग्रेड होना चाहिए। |
| ऋण की किस्मे - ऋण की अवधि |
| कर्जदार - संयुक्त रुप से विकलांग विद्यार्थी और उसके माता-पिता/अभिभावक। |
| ऋण की धनराशि |
| आवश्यकता आधारित वित्त जो इस तथ्य पर निर्भर करेगा कि माता-पिता/विद्यार्थियों की ऋण चुकाने की कितनी क्षमता है जिसकी निम्नलिखित सीमाएं भी होंगी :- |
| क) भारत में अध्ययन - अधिकतम 7-50 लाख रुपये |
| ख) भारत में अध्ययन - अधिकतम 7-50 लाख रुपये |
| प्रोत्साहक का योगदान - |
| क) 4-00 लाख रुपये तक - शून्य |
| ख) भारत में पाठ्यक्रमों के लिए 4-00 लाख से अधिक - 5 प्रतिशत |
इस योजना का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को प्रशिक्षण मुहैया कराना है जिससे कि वे पारम्परिक एवं तकनीकि व्यवसायों एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उचित तकनीकि प्रशिक्षण के माध्यम से सक्षम एवं स्वावलंबी बन सकें। वित्तीय सहायता अनुदान के अनुरुप में एस सी ए के मध्यम से मुहैया कराई जाती है।
| ब्याज दर |
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| क) 50,000/- रुपये तक - 5 प्रतिशत वार्षिक |
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ख) 50,000/- रुपये से अधिक और 5-00 लाख रुपये तक - 6 प्रतिशत वार्षिक |
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| ग)5-00 लाख से अधिक रुपये तक - 8 प्रतिशत वार्षिक |
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| ऋण की अदायगी |
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| क)अदायगी के आरम्भ होने के पश्चात् 07 वर्ष के भीतर यह ऋण चुकाना होगा। |
| ख) ऋण की अदायगी नियमानुसार पाठ्यक्रम की समाप्ति की निर्धारित तिथि से छ: माह पश्चात् अथवा नौकरी मिलने के पश्चात्, जो भी पहले हो। |
| ग) एन एच एफ डी सी से ऋण अवधि पर ब्याज ऋण के देने की तिथि से चार्ज करना आरम्भ कर दिया जाएगा (ऋण नीति के अनुसार ग्रेस अवधि स्वीकार्य है) |
घ) लाभभोगी को प्रत्येक सत्र के पश्चात् मार्कशीट की प्रति एस सी ए को आगे एन एच एफ डी सी को प्रस्तुत करने हेतु देनी होगी। |
| कौशल एवं उद्यमीय विकास हेतु वित्तीय सहायता |
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| उद्देश्य - |
| इस स्कीम का उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को प्रशिक्षण मुहैया कराना है जिससे कि वे पारम्परिक एवं तकनीकि व्यवसायों एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उचित तकनीकि प्रशिक्षण के माध्यम से सक्षम एवं स्वावलंबी बन सकें। वित्तीय सहायता अनुदान के अनुरुप में एस सी ए के माध्यम से मुहैया कराई जाती है। |
| क्षेत्र - |
| स्कीम का क्षेत्र सीमित है - |
| क)जिन लाभभोगियों को एस सी ए के माध्यम से एन एच एफ डी सी से -ऋण प्राप्त हुआ है और अपनी आय के सृजन संबंधी क्रियाकलाप को सफलतापूर्वक जारी रखे हुए हैं। |
| ख) जिन लाभभोगियों को ऋण स्वीकृत हो चुका है और ऋण प्राप्त करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। |
| ग)सम्भाव्य लाभभोगी जो एन एच एफ डी सी से ऋण प्राप्त करना चाहते हैं और ऋण प्राप्त करने के लिए पात्रता को पूरा करते हैं - |
| पात्रता : |
| लाभभोगियों को एन एच एफ डी सी से ऋण प्राप्त करने के लिए पात्रता शर्ते पूर्ण करनी होगी। |
| प्रशिक्षण की अवधि - |
| 5 (पांच) दिन से 3 दिन (तीन) माह |
| अनुदान की धनराशि |
| क)एक वित्त वर्ष में एस सी ए को स्कीम के अर्न्तगत कुल अनुदान एस सी ए को पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक वितरित धनराशि लौटाए गए ऋण को घटाकर के 1 प्रतिशत तक सीमित है। |
| ख) प्रशिक्षण कार्यक्रम की कुल लागत का 85 प्रतिशत एन एच एफ डी सी द्वारा मुहैया कराया जाता है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का केवल 15 प्रतिशत संबंधित एस सी ए द्वारा अंवदत्त किया जाएगा। |
| वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रकिया |
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प्रशिक्षण प्रस्ताव स्टेट चैनेलाइजिंग एजेंसी द्वारा राट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम को प्रस्तुत किया जाएगा। प्रशिक्षण प्रस्ताव स्कीम के अन्तर्गत प्रशिक्षण प्रस्ताव को तैयार करने हेतु मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार तैयार किया जाएगा। |
| प्रशिक्षण संस्थान |
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एस सी ए उपयुक्त प्रशिक्षण संस्थान की पहचान करेगा जो अधिमानत: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई0टी0आई0), पॉलीटेकनिक, इंजिनियरिंग कॉलेज, कृषि विश्वविद्यालय, राट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान आदि जैसे सरकारी संस्थान होंगे। ऐसे प्रशिक्षण प्रस्ताव भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं जिसमे प्रतिष्ठित निजी प्रशिक्षण संस्थान शामिल हों। ऐसे मामलों में संस्थान का प्रोफाइल, उसका पिछला रिकॉर्ड विशेषकर समाज के विकलांग वर्ग के लिए आयोजित किये गये प्रशिक्षण आदि प्रस्तुत किये जाने आवश्यक हैं। अन्ध तथा मूक एवं बघिरों के लिए प्रशिक्षण आयोजित कराने के लिए संस्थान की सुविधाओं की जांच की जानी चाहिए और उसका ब्यौरा प्रशिक्षण प्रस्ताव में दिया जाना चाहिए। |